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आजीविका संवर्धन के लिए कौशल अधिग्रहण और ज्ञान जागरूकता (संकल्प)

I. पृष्ठभूमि

'स्किल इंडिया' एजेंडा अभियान चलाने के लिए- मौजूदा कौशल प्रशिक्षण पहलों का अभिसरण करने और कौशलीकरण प्रयासों में वृद्धि और गुणवत्ता को संयोजित करने के लिए नवंबर 2014 में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) की स्थापना की गई थी। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) की स्थापना, 'स्किल इंडिया' एजेंडा अभियान को संचालित करने, मौजूदा कौशल प्रशिक्षण पहलों का अभिसरण करने और कौशलीकरण प्रयासों में वृद्धि तथा गुणवत्ता को संयोजित करने के लिए नवंबर 2014 में की गई थी। प्रशिक्षार्थियों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाले उत्पादक रोजगार और कैरियर की प्रगति की और ले जाने वाले गुणवत्तात्मक अल्पावधि और दीर्घावधि कौशल विकास के लिए अवसर प्रदान करने वाला समग्र कार्यान्वयन ढांचा तैयार करने के लिए एमएसडीई ने, राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (एनएसडीएम) की शुरुआत की।

एनएसडीएम ने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सात उप-मिशनों की पहचान की है, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। पहचाने गए उप मिशनों में शामिल हैं: (i) संस्थागत प्रशिक्षण, (ii) अवसंरचना, (iii) अभिसरण, (iv) प्रशिक्षक, (v) विदेश में रोजगार, (vi) स्थायी आजीविका और (vii) सार्वजनिक अवसंरचना का उत्थान।

राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (एनएसडीएम) आरम्भ होने के पश्चात, इसकी पूर्ण क्षमता प्राप्त करने में एनएसडीएम का सहयोग करने के लिए ‘संकल्प’ की परिकल्पना की गई थी। एनएसडीएम के अंतर्गत प्रस्तावित उप-मिशनों को तीव्र गति से स्थापित करके कौशल भारत अभियान के संचालन के लिए संकल्प की परिकल्पना की गई है। ‘संकल्प’ विकेंद्रीकरण (जिला ईकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाना), राष्ट्रीय कौशल अर्हता ढाँचा (एनएसक्युएफ) का सार्वभौमीकरण, प्रमाणन और आकलन का मानकीकरण, अभिसरण के बारे में जानकारी, कौशल विकास कार्यक्रमों में गुणवत्ता और निजी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उन्हें बाजार प्रासंगिक बनाने जैसी मौजूदा चुनौतियों का सामना करता है।

II. संकल्प: परिचय

देश भर में युवाओं के लिए गुणवत्ता और बाजार-प्रासंगिक प्रशिक्षण तक पहुंच बढ़ाने के लिए और कौशल विकास के लिए संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए ‘संकल्प’ को 19 जनवरी 2018 को आरंभ किया गया था। संकल्प की कार्यान्वयन अवधि छह वर्ष की है, जो मार्च 2023 तक है। संकल्प का उद्देश्य, कौशल विकास कार्यक्रमों में अभिसरण के बारे में जानकारी देना, गुणवत्ता में बदलाव लाना और उन्हें अल्पकालिक प्रशिक्षण के संदर्भ में निजी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए बाजार को प्रासंगिक और सुलभ बनाकर मौजूदा चुनौतियों का समाधान करना है।

                  चित्र-1: संकल्प के प्रमुख लक्ष्य

III. परिणाम क्षेत्र

संकल्प के चार प्रमुख परिणाम क्षेत्र हैं: (i) केंद्रीय, राज्य और जिला स्तर पर संस्थागत सुदृढ़ीकरण; (ii) कौशल विकास कार्यक्रमों की गुणवत्ता का आश्वासन; (iii) कौशल विकास कार्यक्रमों में वंचित लोगों को शामिल करना; और (iv) पीपीपी के माध्यम से कौशल का विस्तार।

IV. वित्तीय

संकल्प को तीन प्रमुख माध्यमों से वित्तपोषित किया जाता है: (i) 500 मिलियन डॉलर (3300 करोड़ रुपए) की विश्व बैंक ऋण सहायता, प्रत्येक 250 मिलियन डॉलर की दो किस्तों में; परिणामों के लिए कार्यक्रम के अंतर्गत साधन जिसमें कार्यक्रम वित्तपोषण और तकनीकी सहायता शामिल है; (ii) राज्यों का योगदान 100 मिलियन डॉलर (660 करोड़ रुपए); और (iii) 75 मिलियन डॉलर (495 करोड़ रुपए) का उद्योग योगदान। वर्तमान में भारत सरकार और विश्व बैंक के बीच 250 मिलियन डॉलर के लिए समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

V. संवितरण संबद्ध संकेतक (डीएलआई)

संकल्प कौशल विकास के क्षेत्र में एक कार्यनीतिक सुधार कार्यक्रम है और विश्व बैंक से ऋण संवितरण परिणामों की उपलब्धि के एवज में होगा। डीएलआई को एक सत्यापन प्रोटोकॉल के साथ पूरक किया गया है जो परिभाषित करता है कि प्रत्येक डीएलआई की उपलब्धि कैसे मापी जाएगी। सात डीएलआई निम्नानुसार हैं:

क) डीएलआई 1: ऐसे प्रशिक्षार्थी, जिन्होंने एनएसक्यूएफ-संरेखित बाजार-प्रासंगिक अल्पावधि कौशल विकास कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं और उन्हें प्रमाणित कर दिया गया था।

ख) डीएलआई 2: अल्पावधि कौशल विकास कार्यक्रमों के पूर्ण होने के छह माह के भीतर वेतन या स्व-रोजगार प्राप्त करने वाले स्नातकों का प्रतिशत।

ग) डीएलआई 3: मॉडल पाठ्यचर्या में परिवर्तित एनएसक्युएफ संरेखित क्यूपी, प्रशिक्षक गाइड और शिक्षण अधिगम स्रोत पैक।

घ) डीएलआई 4: प्रशिक्षित/पुनर्प्रशिक्षित प्रशिक्षकों और आकलनकर्ताओं की संख्या।

ङ) डीएलआई 5: संस्थागत सुदृढ़ीकरण पर राज्यों का बेहतर प्रदर्शन, कौशल विकास कार्यक्रमों की बाजार प्रासंगिकता तथा वंचित लोगों तक पहुँच और उनके द्वारा प्रशिक्षण पूरा करना।

च) डीएलआई 6: कौशल विकास कार्यक्रमों (प्रमाणित) (स्व-रोजगार और आरपीएल शामिल नहीं) में भाग लेने वाली महिलाओं के प्रतिशत में वृद्धि।

छ) डीएलआई 7: सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संयुक्त वित्तपोषण को प्राथमिकता वाली कौशल विकास पहलों में सफलतापूर्वक शामिल किया गया और इसका उपयोग किया गया।

VI. शासन अवसंरचना

संकल्प के अंतर्गत निम्नलिखित 3 स्तरीय शासन अवसंरचना है:

क) परियोजना शासन बोर्ड (पीजीबी): का गठन, समय-समय पर परियोजना की प्रगति की समीक्षा करने और दिशा-निर्देश जारी करने के लिए शीर्ष स्तर पर माननीय मंत्री, एमएसडीई की अध्यक्षता में किया गया है। पीजीबी आवश्यक होने पर परियोजना कार्यान्वयन व्यवस्थाओं में परिवर्तन होने के संबंध में, निर्देश भी जारी कर सकता है। पीजीबी की प्रथम बैठक 2 अगस्त 2019 को हुई थी।

 

ख) परियोजना अनुमोदन बोर्ड (पीएबी): के अध्यक्ष सचिव, एमएसडीई सह सदस्य-सचिव, एनएसडीएम हैं। पीएबी नीतिगत दिशा निर्देश जारी करता है, संकल्प के तहत प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी और समीक्षा करता है। अब तक पीएबी की पांच बैठकें हो चुकी हैं।

ग) परियोजना अनुवीक्षण समिति (पीएससी): के अध्यक्ष अपर सचिव, एमएसडीई हैं। पीएससी प्रस्तावों को पीएबी के अनुमोदन के लिए भेजने से पूर्व उनका अनुवीक्षण करता है। अब तक पीएससी की पांच बैठकें हो चुकी हैं।

VII. प्रमुख हस्तक्षेप

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय फैलोशिप (एमजीएनएफ)

एमजीएनएफ को कौशल विकास कार्यक्रम के परिणामों में सुधार के साथ-साथ प्रतिबद्ध और सक्षम विकासकर्ताओं का संवर्ग तैयार करने में जिला प्रशासन का सहयोग करने के लिए आरंभ किया गया है। प्रायोगिक परियोजना के रूप में दो वर्षों के लिए 75 फेलो को गुजरात, कर्नाटक, मेघालय, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 75 जिलों में तैनात किया जाएगा। आईआईएम-बेंगलूरु को फेलोशिप कार्यक्रम के लिए शैक्षणिक भागीदार के रूप में शामिल किया गया है। आईआईएम-बेंगलूरु के साथ 9 अक्तूबर 2019 को अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके अतिरिक्त, फैलोशिप कार्यक्रम पूर्ण होने पर फैलो को आईआईएम-बेंगलूरु का लोक नीति और प्रबंधन में प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया को 14 अक्तूबर 2019 को लाइव किया गया था जिसमें 2,911 आवेदन प्राप्त हुए। लिखित परीक्षा 8 दिसंबर 2019 को आयोजित की गई थी। फैलो की अंतिम सूची 30 जनवरी 2020 को घोषित की गई थी और चयनित उम्मीदवारों को प्रस्ताव पत्र भेजे गए थे। इस कार्यक्रम के 8 मार्च 2020 से आईआईएम-बेंगलूरु में शुरू होने की उम्मीद है।

  • जिला कौशल विकास योजना में उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार (डीएसडीपी पुरस्कार)

विकेंद्रीकृत योजना को बढ़ावा देने के लिए, मंत्रालय द्वारा संकल्प के अंतर्गत जिला कौशल विकास योजना (डीएसडीपी) पुरस्कार का गठन किया गया है। यह पुरस्कार वित्त वर्ष 2018-19 में आरंभ किया गया था, जिसमें सभी राज्यों/संघशासित क्षेत्रों के जिलों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। देश के 700 से अधिक जिलों में से 225 जिलों ने एमएसडीई में अपने डीएसडीपी जमा करके भाग लिया। इस प्रकार प्रस्तुत डीएसडीपी का मूल्यांकन किया गया और इन 225 जिलों में से, 25 जिलों को नामित समितियों द्वारा मूल्यांकन के माध्यम से शॉर्टलिस्ट किया गया था। सचिव, एमएसडीई की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित बैठक में इन जिलों के पदधारियों को उनकी डीएसडीपी को मूल्यांकन समिति के समक्ष प्रदर्शन के लिए बुलाया गया। तदनुसार, 7 जिलों की पहचान पुरस्कार के लिए, 6 जिलों की पहचान उत्कृष्ठता प्रमाण-पत्र के लिए और 7 जिलों की पहचान प्रशंसा-पत्र के लिए की गई थी।

  • संकल्प क्षेत्रीय कार्यशाला

विश्व बैंक द्वारा लाइटहाउस इवेंट के रूप में स्वीकार करते हुए, संकल्प क्षेत्रीय कार्यशाला एक ऐसे मंच के रूप में कार्य करती है, जिसमें राज्य/संघशासित क्षेत्र कौशल इकोसिस्टम में अपने अनुभवों का आदान-प्रदान करते हैं। कार्यशालाएं संकल्प के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देती हैं और विभिन्न पहलें प्रारम्भ की जा रही हैं। राज्यों के समूह में विविधता लाने के लिए, भाग लेने वाले राज्यों का समूह, देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। 22 राज्यों/संघशासित क्षेत्रों की भागीदारी से अब तक चार क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है।

  • संकल्प सर्वोत्तम कार्य पोर्टल

विश्व बैंक के सहयोग से एमएसडीई ने कौशल विकास में सर्वोत्तम कार्यों को अपनाने के लिए एक पोर्टल तैयार और आरंभ किया है। एमएसडीई ने राज्यों से अनुरोध किया है कि वे पोर्टल पर वीडियो, केस स्टडी, प्रशंसापत्र और तस्वीरों के रूप में अपनी सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रस्तुत करें और कौशल विकास में उभरती सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों को प्रदर्शित करें। इसके अतिरिक्त, एमएसडीई अब निक्सी के सूचीबद्ध वेंडरों के माध्यम से पोर्टल में वृद्धि कर रहा है।

  • विषयगत कार्यशालाएं

जिला कौशल समिति (डीएससी) के सदस्यों और जिला कार्यकारिणी की क्षमता का निर्माण करने के लिए, संकल्प के अंतर्गत विषयगत कार्यशालाओं की योजना बनाई गई है। ये कार्यशालाएँ जिला कौशल विकास योजना (डीएसडीपी) के विकास के लिए छत्तीसगढ़, केरल, महाराष्ट्र, नागालैंड, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के डीएससी सदस्यों के साथ जिला कौशल नियोजन, जुटाना, परामर्श, एमएवंई, आदि जैसे विभिन्न विषयों को शामिल करती हैं। इसके अतिरिक्त, एनआईआरडी और इग्नू के साथ चर्चा चल रही है कि वे अलग-अलग पहचान वाले विषयों पर अखिल भारतीय स्तर पर कार्यशालाओं का संचालन करें।